गंभीर लापरवाही: प्राथमिक विद्यालय गोगेपुर में कीड़ों वाले आटे का भोजन, इंचार्ज प्रधानाध्यापक हफ्तों से गायब
रिपोट : राजवेंद्र यादव
शाहजहांपुर: जनपद शाहजहांपुर के विकासखंड जैतीपुर के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय गोगेपुर में शिक्षा विभाग की व्यवस्था और छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक की लगातार अनुपस्थिति और मिड-डे मील में दी जा रही घटिया सामग्री ने स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों को आक्रोशित कर दिया है।
प्रकरण की विस्तृत जानकारी
इंचार्ज प्रधानाध्यापक की लंबी अनुपस्थिति: विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक राकेश कुमार पिछले कई हफ्तों और महीनों से विद्यालय से नदारद हैं। उनके इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण विद्यालय का संचालन पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है और बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है।
कीड़े पड़े आटे का उपयोग: विद्यालय में खाना बनाने वाली महिलाओं ने अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए बताया कि उन्हें प्रधानाध्यापक द्वारा कीड़े लगे और खराब गुणवत्ता वाले आटे का ही इस्तेमाल करके भोजन बनाने का निर्देश दिया जाता है।
मीनू का घोर उल्लंघन: उत्तर प्रदेश सरकार की मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पौष्टिक और विविध आहार जैसे दूध, फल, दाल और विभिन्न सब्जियां परोसी जानी चाहिए। लेकिन इस विद्यालय में पिछले एक महीने से केवल 'तहरी' ही बनाई जा रही है, जिससे बच्चे आवश्यक पोषण से वंचित हो रहे हैं।
शिकायतों की अनदेखी: स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले को कई बार अधिकारियों के संज्ञान में लाने की कोशिश की, लेकिन इंचार्ज प्रधानाध्यापक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और उनकी मनमानी लगातार जारी है।
विद्यालय में अव्यवस्था और रसोइयों की लाचारी
अराजकता का माहौल: प्रधानाध्यापक के महीनों तक विद्यालय न आने से छात्रों और अन्य कर्मचारियों के बीच अनुशासनहीनता और अराजकता का माहौल बन गया है।
रसोइयों पर दबाव: खाना बनाने वाली महिलाओं ने बताया कि जब वे खराब सामग्री के बारे में आपत्ति जताती हैं, तो उन्हें डांटकर चुप करा दिया जाता है। वे डरी हुई हैं क्योंकि उन्हें अपनी नौकरी जाने का भी डर है, इसलिए वे बच्चों को दूषित भोजन परोसने के लिए मजबूर हैं।
बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले मासूम बच्चे बहुत छोटे होते हैं। कीड़े लगे और खराब आटे का सेवन करने से उन्हें फूड पॉइजनिंग, डायरिया, पेट दर्द और उल्टी-दस्त जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति कुपोषण को भी बढ़ावा दे सकती है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों की प्रमुख मांगें
तत्काल निलंबन और जांच: इंचार्ज प्रधानाध्यापक राकेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।
भोजन की गुणवत्ता की जांच: मिड-डे मील में प्रयोग होने वाले सभी प्रकार के अनाज, मसालों और तेल की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
वैकल्पिक व्यवस्था: विद्यालय में बच्चों के लिए एक जिम्मेदार और नियमित शिक्षक को प्रभार सौंपा जाए ताकि उनकी पढ़ाई और पोषण दोनों सुरक्षित रह सकें।
यह मामला न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) स्तर से तुरंत कार्रवाई की जानी आवश्यक है।


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