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सरकारी सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे हेडमास्टर, हफ्तों गायब रहने के बावजूद रजिस्टर में दर्ज हो रही हाजिरी

रिपोर्ट : चीफ एडिटर ठा.राघवेन्द्र प्रताप सिंह 


शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर मिशन कायाकल्प के जरिए सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर शाहजहांपुर के तिलहर तहसील से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। विकासखंड जैतीपुर के ग्राम गोगेपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। आरोप है कि यहाँ के इंचार्ज प्रधानाध्यापक राकेश मानवल अपनी मर्जी के मालिक बने हुए हैं और हफ्तों विद्यालय से नदारद रहते हैं।


एसएमसी अध्यक्ष का बड़ा खुलासा: राष्ट्रीय पर्वों पर भी रहे अनुपस्थित
विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के अध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह ने प्रधानाध्यापक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि लगातार अनुपस्थिति: प्रधानाध्यापक राकेश मानवल 19 फरवरी से 24 फरवरी तक स्कूल नहीं आए।
रजिस्टर में खेल: आरोप है कि वह महीने में केवल 4-5 दिन ही स्कूल आते हैं, लेकिन महीने के अंत में रजिस्टर पर अपनी पूरे माह की उपस्थिति दर्ज कर देते हैं। राष्ट्रीय पर्व का अपमान: अध्यक्ष का कहना है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्वों पर भी प्रधानाध्यापक विद्यालय नहीं पहुंचे, जो एक सरकारी कर्मचारी के लिए घोर अनुशासनहीनता है।जब स्कूल का मुखिया ही गायब रहेगा, तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा? न यहाँ मीनू के हिसाब से खाना (MDM) बनता है और न ही पढ़ाई का कोई स्तर बचा है।" - कृष्ण पाल सिंह, अध्यक्ष SMC

शिकायत के बाद भी अधिकारी मौन

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब पत्रकारों ने 4 फरवरी को एबीएसए (ABSA) जैतीपुर से संपर्क किया था, तो उन्होंने मामले पर संज्ञान लेने की बात कही थी। लेकिन हफ़्तों बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं दिखी। इससे स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी रोष है। लोगों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक को कुछ उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

प्रमुख बिंदु जो व्यवस्था पर उठाते हैं सवाल:

मिड-डे मील (MDM): स्कूल में भोजन मीनू के अनुसार नहीं बनाया जा रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही: शिकायत के बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा ठोस कदम न उठाना।

निरंकुशता: प्रधानाध्यापक द्वारा फोन रिसीव न करना और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना।

अब देखना यह होगा कि शाहजहांपुर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी इस 'दबंग' शिक्षक के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर गोगेपुर के इन नौनिहालों का भविष्य ऐसे ही अंधकार में बना रहेगा।